एर्नाकुलम: केरल की हरी-भरी भूमि पर, जहां नारियल के पेड़ आकाश को छूते हैं और समुद्र की लहरें तट से टकराती हैं, एक ऐसी कहानी शुरू हुई जो आज वैश्विक स्तर पर चमक रही है। यह कहानी है मसालों की, उद्यमिता की और केरल के बदलते कारोबारी परिदृश्य की। हम बात कर रहे हैं एर्नाकुलम जिले में स्थित माने कंकोर कंपनी की, जो स्विटजरलैंड या किसी यूरोपीय देश की तरह लग सकती है, लेकिन यह शुद्ध रूप से भारतीय उद्यम की मिसाल है।
यह सब 1850 के दशक में शुरू हुआ। उस समय केरल के दूरदर्शी उद्यमी मसाला व्यापार की अपार संभावनाओं को पहचान चुके थे। काली मिर्च की तेज सुगंध, इलायची की मीठी महक, दालचीनी की गर्माहट और हल्दी की सुनहरी चमक – इन सबने एक सुगंधित क्रांति की नींव रखी। मसाले न केवल खाने का स्वाद बढ़ाते थे, बल्कि वे व्यापार का सोना थे। दुनिया भर के व्यापारी केरल की ओर खिंचे चले आते थे, क्योंकि यहां की मिट्टी और जलवायु मसालों को अनोखी गुणवत्ता प्रदान करती थी। 175 साल पहले शुरू हुआ यह सफर आज भी जारी है, और कंकोर इसी विरासत का वारिस है।
1969 में, अंगमाली में कंकोर की स्थापना हुई। शुरुआत छोटी थी – एक साधारण मसाला उत्पादन इकाई। लेकिन कंपनी के संस्थापकों ने सपना देखा था बड़ा। वे जानते थे कि मसाले सिर्फ किचन का हिस्सा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और दवा का भी आधार हैं। धीरे-धीरे, कंपनी ने अपनी जड़ें मजबूत कीं। पहले दशक में, उन्होंने स्थानीय बाजार पर ध्यान केंद्रित किया, लेकिन जल्द ही वैश्विक महत्वाकांक्षाएं जागीं। 1980 के दशक तक, कंकोर ने निर्यात शुरू कर दिया। यूरोप, अमेरिका और एशिया के बाजारों में केरल के मसाले पहुंचने लगे। कंपनी का राजस्व बढ़ता गया, और कर्मचारियों की संख्या भी। लेकिन असली विकास 1990 के दशक में आया, जब कंपनी ने उन्नत तकनीक को अपनाया।
आज कंकोर सिर्फ मसाले नहीं बेचती, बल्कि मूल्यवर्धित उत्पाद बनाती है। स्वास्थ्य पूरक, प्राकृतिक दवाएं और विशेष एक्सट्रैक्ट – ये सब अब कंपनी के पोर्टफोलियो में शामिल हैं। सिर्फ मसालों से ही कंपनी को 600 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है। यह आंकड़ा केरल जैसे राज्य के लिए आश्चर्यजनक है, जहां परंपरागत रूप से पर्यटन और कृषि पर निर्भरता रही है। लेकिन कंकोर ने साबित किया कि नवाचार से कुछ भी संभव है। कंपनी की फैक्टरी में सबसे आधुनिक मशीनें काम करती हैं – स्वचालित प्रसंस्करण लाइनें, उच्च दबाव निष्कर्षण सिस्टम और गुणवत्ता नियंत्रण लैब्स। यहां हर मसाले को वैज्ञानिक तरीके से परखा जाता है, ताकि दुनिया भर के ग्राहक सर्वोत्तम उत्पाद पाएं।
भारत और वियतनाम जैसे देश मसाला उत्पादन में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। वियतनाम तो काली मिर्च का सबसे बड़ा उत्पादक बन चुका है। लेकिन गुणवत्ता और प्रसंस्करण में केरल अभी भी अव्वल है। क्यों? क्योंकि यहां की कंपनियां जैसे कंकोर, R&D पर जोर देती हैं। कंपनी की शीर्ष-स्तरीय प्रयोगशालाएं नए फॉर्मूले विकसित करती हैं, जो मसालों को अधिक प्रभावी बनाते हैं। उदाहरण के लिए, हल्दी से निकाले गए कर्क्यूमिन को स्वास्थ्य सप्लीमेंट में बदलना – यह नवाचार कंकोर की ताकत है। केरल का लाभ यह है कि यहां शोध संस्थान प्रचुर हैं। आईआईटी, विश्वविद्यालय और कृषि अनुसंधान केंद्र मिलकर एक मजबूत इकोसिस्टम बनाते हैं। कुशल कार्यबल – इंजीनियर, वैज्ञानिक और किसान – सब एक साथ काम करते हैं। सरकार की सहायता प्रणाली भी व्यवसायों को बढ़ावा देती है, जैसे निर्यात प्रोत्साहन और सब्सिडी।
लेकिन विकास की कहानी सिर्फ तकनीक और संसाधनों तक सीमित नहीं है। दुनिया बदल रही है। खाने की आदतें तेजी से परिवर्तित हो रही हैं। भारतीय भोजन अब हर देश में लोकप्रिय है – करी, बिरयानी, मसाला चाय। एशिया सबसे बड़ा मसाला बाजार बन रहा है, जहां मांग 10-15% सालाना बढ़ रही है। कंकोर इस अवसर को भुनाती है। कंपनी ने एशियाई बाजारों में विस्तार किया, जहां स्वास्थ्य-उन्मुख उत्पादों की डिमांड ज्यादा है। उदाहरण के लिए, प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स से बने सप्लीमेंट्स, जो इम्यूनिटी बढ़ाते हैं। महामारी के बाद, ऐसे उत्पादों की बिक्री दोगुनी हो गई। कंकोर का राजस्व अब 1000 करोड़ की ओर बढ़ रहा है, और यह सब केरल से संचालित हो रहा है।
कंपनी के सीईओ गीमन कोरह की सलाह इस कहानी का सार है। वे कहते हैं, “दूसरों द्वारा अपनाए गए पारंपरिक रास्तों का अनुसरण न करें। व्यवसाय में सफल होने के लिए, आपको अद्वितीय, असाधारण और अभिनव समाधान खोजने होंगे। उद्योग में अपनी छाप छोड़ने के लिए विभेदीकरण महत्वपूर्ण है।” कंकोर ने यही किया। जहां अन्य कंपनियां मात्र कच्चे मसाले बेचती हैं, कंकोर ने वैल्यू ऐडेड प्रोडक्ट्स पर फोकस किया। उन्होंने किसानों के साथ साझेदारी की, जहां ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा दिया। इससे न केवल गुणवत्ता बढ़ी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मजबूत हुई। आज कंकोर 5000 से ज्यादा किसानों से जुड़ी है, जो उन्हें कच्चा माल प्रदान करते हैं।
भविष्य में, कंकोर का विकास और तेज होगा। सस्टेनेबल प्रैक्टिसेस पर जोर – जैसे पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग और वेस्ट रिडक्शन। कंपनी बायोटेक में निवेश कर रही है, जहां मसालों से नए दवा फॉर्मूले बनाए जाएंगे। एशिया के अलावा, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका नए बाजार हैं। केरल का कारोबारी परिदृश्य बदल रहा है – स्टार्टअप्स, आईटी और बायोटेक के साथ मसाला उद्योग भी चमक रहा है। कंकोर जैसी कंपनियां साबित करती हैं कि छोटे राज्य से वैश्विक साम्राज्य बनाया जा सकता है।
यह कहानी सिर्फ एक कंपनी की नहीं, बल्कि पूरे केरल की है। जहां मसालों की खुशबू से शुरू हुआ सफर, आज करोड़ों के राजस्व में बदल चुका है। युवा उद्यमियों के लिए संदेश साफ है: नवाचार अपनाओ, पारंपरिक रास्ते छोड़ो, और दुनिया जीतो। कंकोर की विकास यात्रा हमें सिखाती है कि सपने बड़े देखो, और मेहनत से उन्हें हकीकत बनाओ।
